भूमिका

( व्यासजी के व्यंग्य लेख )  

भूमिका
अगर गधे के सिर पर सींग होते ?
खुदा ने गंजों को नाखून दिये होते ?
झूठ बराबर तप नहीं
व्यंग्य पर व्यंग्य
ठंड : आजादी : समाजवाद
खुशामद भी एक कला है
माफ़ कीजिये
हे हिन्दी के आलोचको !
हिन्दी की होली तो हो ली
अगर ताजमहल में अस्पताल बन गया होता
दुनिया के पतियो एक हो जाओ
यदि कृष्ण आज मथुरा पधारते
अगर कविता में 'माने' न होते
कौन कहता है मुझे दिखाई नहीं देता
रहीम की कहानी : उनके मज़ार की जुबानी
नये साहित्य का नवीनतम काल-विभाजन
मेरी पत्नी भली तो हैं, लेकिन......
पत्नी एक समस्या
नारदजी को व्यासजी का नमस्कार !(दैनिक हिन्दुस्तान से)


पं. गोपालप्रसाद व्यास कवि के रूप में इतने अधिक लोकप्रिय हुए कि उनका गद्यकार का रूप कुछ छिप-सा गया। जबकि सच्चाई यह है व्यासजी ने जिस मात्रा में काव्य-रचना की है, उससे कहीं ज्यादा गद्य-रचनाएं लिखी हैं। व्यासजी ने व्यंग्य-लेख, निबंध, संस्मरण, उपन्यास, यात्रा -वृत्तांत आदि विधाओं में अपनी कलम बखूबी चलाई है। वरिष्ठ आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने व्यासजी के गद्य की प्रशंसा करते हुए कहा था- "हिन्दी का अच्छा गद्य जिन्होंने लिखा है वे अधिकांश पत्रकार रहे हैं। पत्रकारों का लेखन जल्दी का लेखन होता है, इसीलिए उसमें चर्बी नहीं होती। यह चर्बी विशेषणों से आती है और वाक्य लंबे होते हैं, जबकि पत्रकारों के लेखों में वाक्य छोटे-छोटे होते हैं। व्यासजी एक सफल पत्रकार थे, इसलिए उनका गद्य मेरी दृष्टि में उनके पद्य से अधिक प्रभावोत्पादक, सरल और सरस है।'' आइए, व्यासजी के व्यंग्य-साहित्य का आस्वादन करें।



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