माफ़ कीजिए

( व्यासजी के व्यंग्य लेख )  

भूमिका
अगर गधे के सिर पर सींग होते ?
खुदा ने गंजों को नाखून दिये होते ?
झूठ बराबर तप नहीं
व्यंग्य पर व्यंग्य
ठंड : आजादी : समाजवाद
खुशामद भी एक कला है
माफ़ कीजिये
हे हिन्दी के आलोचको !
हिन्दी की होली तो हो ली
अगर ताजमहल में अस्पताल बन गया होता
दुनिया के पतियो एक हो जाओ
यदि कृष्ण आज मथुरा पधारते
अगर कविता में 'माने' न होते
कौन कहता है मुझे दिखाई नहीं देता
रहीम की कहानी : उनके मज़ार की जुबानी
नये साहित्य का नवीनतम काल-विभाजन
मेरी पत्नी भली तो हैं, लेकिन......
पत्नी एक समस्या
नारदजी को व्यासजी का नमस्कार !(दैनिक हिन्दुस्तान से)

क्या आप सभ्य जगत के किसी ऐसे एक शब्द को बता सकते हैं, जो नाक काटकर दुशाले से पोंछ लेता हो ?
क्या मतलब ?
मतलब यह कि ऐसा शब्द जो मारता तो हो, लेकिन रोने नहीं देता !
अजीब प्रश्न है। जरा खोलकर समझाइए।
ऐसा शब्द जो शरीफानी गली के बाद ही इस्तेमाल में लाया जाता है। यानी जो सब कुछ कहकर भी लीपा-पोती कर देता है।
माफ़ कीजिए, हम अभी भी नहीं समझे ।
तो फिर समझ लीजिए, वह शब्द 'माफ़ कीजिए' ही है।
वह कैसे ?
इस तरह, हम आपसे कहें-आप निरे बुद्धू हैं। इतनी छोटी-सी बात भी आप नहीं समझ सकते तो आप में और वैशाख के नंदन में फिर क्या फ़र्क है ?
और इससे पहले की आपकी आंखें लाल हो जाएं और मुठ्ठियां बंधने लगे और आप अकर्मक विचार से सकर्मक क्रिया पर उतारू हों, हम फौरन पैंतरा बदलकर कहें- 'माफ़ कीजिए', हमारा मकसद आपका अपमान करना या दिल दुखाना नहीं है। हम तो दोस्ताना तरीके से आपसे कह रहे हैं कि आप जैसे बुद्धिमान की समझ में इतनी मोटी बात तो आसानी से आ ही जानी चाहिए थी!
जी !
तो 'माफ़ कीजिए' शब्द वह लाल झंडी है, जो तेजी से एक तरफ दौड़ते हुए विचारों पर फौरन ब्रेक लगा देती है और बड़ी-से-बड़ी दुर्घटनाओं को तत्काल रोक देती है।
जी, यह कि निन्यानबे गाली एक तरफ और हल्का-सा 'माफ़ कीजिए' एक तरफ ! 'माफ़ कीजिए' भी एक प्रकार की गाली है। ऐसी गाली, जो लगकर भी नहीं लगती। बल्कि शेष गालियों के बाहरी प्रभाव को रोकने में रामबाण की तरह काम करती है।
जी !
'माफ़ कीजिए' गाली ही नहीं, ढाल भी है। आप सरेआम किसी की पगड़ी उछाल दीजिए और उसके बाद दबी जुबान से 'माफ़ कीजिए' कह दीजिए, साफ बच जाएंगे। राह चलते किसी को धक्का देकर गिरा दीजिए और उठने के पहले ही उसका हाथ पकड़कर 'माफ़ कीजिए' कह दीजिए, आपका बाल भी बांका न होगा। आप कर भी क्या सकते हैं ? अगर कोई आपका कलम उठाकर लिखने लगे और आपका पॉइंट बिगाड़ दे, आपका एलबम देखने लगे और अपनी अंगुलियों के निशान भी उन पर छोड़ जाए, आपकी पुस्तक ले जाए और न लौटाए और आपके कुछ कहने से पहले ही 'माफ़ कीजिए' का तीर चला दे तो आपके पास घायल होने के अलावा और चारा भी क्या है।
जी !
जी, आप शरीफ आदमी हैं और माफ़ कीजिए कहने वाले आपकी इस कमज़ोरी को जानते हैं। इसलिए वे आपको धकेलते हुए और 'माफ़ कीजिए' कहते हुए बस में चढ़ जाते है। रेल में आपकी सीट पर 'माफ़ कीजिए' कहते हुए जम जाते हैं।
जी !
इसलिए हम आपको सलाह देते हैं कि आज की दुनिया में सभ्य बनकर रहना है तो आज से ही 'माफ़ कीजिए' शब्द को गांठ में बांध लीजिए और संकट के समय अमोघ मंत्र की तरह इसका जाप कीजिए और देखिए फिर कोई मुसीबत, ताप और संताप आपको कैसे व्याप पाते हें।
जी !

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