यारो, मारो डींग !

(ब्रज-काव्य की कविताएं )  

भूमिका
गोपिन के अधरान की भाषा
अनंग-सी अंगना
योजना बनाओ तो ........
खर्राटे
रास-रसोत्सव
गिरिराज महाराज की जय !
नमो-नमो यमुना महारानी !
मथुरा-महिमा ?
यारो, मारो डींग !
रसिया
हँसीले दोहे
हम और अहम

यारो, मारो डींग !

कहौ हमारे बाप के बाप, बाप के बाप,
उनके जूता कौ हुतौ छप्पन गज कौ नाप।
छप्पन गज कौ नाप कि वामैं घुसिगौ हाथी,
बीस बरस तक रह्‌यौ, चरन-तल कौ संगाती।
मसकि पाँव इक दिन पर्‌यौ, पिचक गयौ गजराज,
ता जूता कूँ लै उड़े गोरेलाल जहाज।
कहौ-अस्तोवचन !

जा जूता के जोर ते चमक रहे अँगरेज,
वाकी ठोकर ते खुदी मिस्त्र देस में स्वेज।
मिस्त्र देस में स्वेज, कील ते निकसे, राकिट,
गई उधेरी खाल, बनी हिटलर की जाकिट।
कतरन अमरीका गई, साँच बुलावै अम्ब,
ताही सौं पैदा भयौ पहलौ ऐटम बम्ब।
कहौ-अस्तोवचन !

('गोपिन के अधरान की भाषा' से, सन्‌ 1998)

 

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