चले आ रहे हैं

( लोकप्रिय हास्य कविताएं )  

भूमिका
पत्नी को परमेश्वर मानो
आराम करो !
साली क्या है रसगुल्ला है
साला ही गरम मसाला है
सास नहीं, भारत माता हैं
हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम !
नई क्रांति
चले आ रहे हैं
पलकों पर किसे बिठाऊं मैं ?
एजी कहूं कि ओजी कहूं ?
समधिन मेरी रसभीनी है
मामाजी !
जूते चले गए
नहाऊं मैं !
अनारी नर
धन्यवाद
भाभीजी नमस्ते


है कद इनका गुटका
मगर पेट मटका,
अजब इनकी बोली,
गज़ब इनका लटका,
है आंखों में सुरमा,
औ' कानों में बाला,
ये ओढ़े दुशाला चले आ रहे हैं !
ये लाली के लाला चले आ रहे हैं !

कभी ये न अटके,
कभी ये न भटके,
खरे ही चले इनके
सिक्के गिलट के।
खरे ये न खोटे,
लुढ़कने ये लोटे,
बिना पंख देखो उड़े जा रहे हैं !
ये लाली के लाला चले आ रहे हैं !

है ओठों पे लाली,
रुखों पर गुलाली,
घड़ी जेब में है,
छड़ी भी निराली,
ये सोने में पलते,
ये चांदी में चलते,
ये लोहे में ढलते हैं गरमा रहे हैं !
ये लाली के लाला चले आ रहे हैं !

 

 


 

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