नई क्रांति

( लोकप्रिय हास्य कविताएं )  

भूमिका
पत्नी को परमेश्वर मानो
आराम करो !
साली क्या है रसगुल्ला है
साला ही गरम मसाला है
सास नहीं, भारत माता हैं
हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम !
नई क्रांति
चले आ रहे हैं
पलकों पर किसे बिठाऊं मैं ?
एजी कहूं कि ओजी कहूं ?
समधिन मेरी रसभीनी है
मामाजी !
जूते चले गए
नहाऊं मैं !
अनारी नर
धन्यवाद
भाभीजी नमस्ते



कल मुझसे मेरी 'वे' बोलीं
''क्योंजी, एक बात बताओगे ?''
''हां-हां, क्यों नहीं!'' जरा मुझको
इसका रहस्य समझाओगे ?
देखो, सन्‌ सत्तावन बीता,
सब-कुछ ठंडा, सब-कुछ रीता,
कहते थे लोग गदर होगा,
आदमी पुनः बंदर होगा।
पर मुन्ना तक भी डरा नहीं।
एक चूहा तक भी मरा नहीं !
पहले जैसी गद्दारी है,
पहले-सी चोरबजारी है,
दिन-दिन दूनी मक्कारी है,
यह भ्रांति कहो कब जाएगी ?
अब क्रांति कहो कब आएगी ?''

यह भी क्या पूछी बात, प्रिये !
लाओ, कुछ आगे हाथ प्रिये !
हां, शनि मंगल पर आया है,
उसने ही प्रश्न सुझाया है।

तो सुनो, तुम्हें समझाता हूं,
अक्कल का बटन दबाता हूं,
पर्दा जो पड़ा उठाता हूं,
हो गई क्रांति बतलाता हूं।

 


 


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