अनारी नर

( लोकप्रिय हास्य कविताएं )  

भूमिका
पत्नी को परमेश्वर मानो
आराम करो !
साली क्या है रसगुल्ला है
साला ही गरम मसाला है
सास नहीं, भारत माता हैं
हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम !
नई क्रांति
चले आ रहे हैं
पलकों पर किसे बिठाऊं मैं ?
एजी कहूं कि ओजी कहूं ?
समधिन मेरी रसभीनी है
मामाजी !
जूते चले गए
नहाऊं मैं !
अनारी नर
धन्यवाद
भाभीजी नमस्ते



राधा को मैंने आराधा
गांधी से छुट्टी पाने पर।
मर्दों से उठ विश्वास गया,
शास्त्रीजी के उठ जाने पर।

अब नारी का युग आया है,
पुरुषों के पुरखो, सावधान।
नर से लेकर वानर तक की,
आएगी अक्ल ठिकाने पर।

युग योगेश्वर का बीत गया,
दिन मर्यादापति के बीते।
रावण से लेकर रामचन्द्र,
चिल्लाते हैं-सीते ! सीते !!

इसलिए बदलकर अपना स्वर,
मैं 'व्यास' उठाकर अपना कर।
कहता हूं- बन्दो, याद रखो,
नारी के बिना अनारी नर।

पश्चिम की जय ! जिसका प्रकाश
भारत पर बढ़ता आता है।
काली कमली पर सूरदास,
रंग दूजा चढ़ता जाता है।


 


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