नहाऊं मैं !

( लोकप्रिय हास्य कविताएं )  

भूमिका
पत्नी को परमेश्वर मानो
आराम करो !
साली क्या है रसगुल्ला है
साला ही गरम मसाला है
सास नहीं, भारत माता हैं
हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम !
नई क्रांति
चले आ रहे हैं
पलकों पर किसे बिठाऊं मैं ?
एजी कहूं कि ओजी कहूं ?
समधिन मेरी रसभीनी है
मामाजी !
जूते चले गए
नहाऊं मैं !
अनारी नर
धन्यवाद
भाभीजी नमस्ते


तुम कहती हो कि नहाऊं मैं !
क्या मैंने ऐसे पाप किए,
जो इतना कष्ट उठाऊं मैं ?

क्या आत्म-शुद्धि के लिए ?
नहीं, मैं वैसे ही हूं स्वयं शुद्ध,
फिर क्यों इस राशन के युग में,
पानी बेकार बहाऊं मैं ?

यह तुम्हें नहीं मालूम
डालडा भी मुश्किल से मिलता है,
मैं वैसे ही पतला-दुबला
फिर नाहक मैल छुडाऊं मैं ?

औ' देह-शुद्धि तो भली आदमिन,
कपड़ों से हो जाती है !
ला कुरता नया निकाल
तुझे पहनाकर अभी दिखाऊं मैं !

''मैं कहती हूं कि जनम तुमने
बामन के घर में पाया क्यों ?
वह पिता वैष्णव बनते हैं
उनका भी नाम लजाया क्यों ?''

तो बामन बनने का मतलब है
सूली मुझे चढ़ा दोगी ?
पूजा-पत्री तो दूर रही
उल्टी यह सख्त सजा दोगी ?


 


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