एजी कहूं कि ओजी कह

( लोकप्रिय हास्य कविताएं )  

भूमिका
पत्नी को परमेश्वर मानो
आराम करो !
साली क्या है रसगुल्ला है
साला ही गरम मसाला है
सास नहीं, भारत माता हैं
हाय, न बूढ़ा मुझे कहो तुम !
नई क्रांति
चले आ रहे हैं
पलकों पर किसे बिठाऊं मैं ?
एजी कहूं कि ओजी कहूं ?
समधिन मेरी रसभीनी है
मामाजी !
जूते चले गए
नहाऊं मैं !
अनारी नर
धन्यवाद
भाभीजी नमस्ते


 

'एजी' कहूं कि 'ओजी' कहूं
'सुनोजी' कहूं कि 'क्योंजी' कहूं
'अरे ओ' कहूं कि 'भाई' कहूं
कि सिर्फ भई ही काफी है ?
अब तुम्हीं कहो, क्या कहूं ?
तुम्हारे घर में कैसे रहूं ?

'सरो' कहूं या 'सरोजिनी'
पर नाम न तुम लेने देतीं !
तो 'जग्गो' की जीजी कह दूं ?
ए 'शीला की संगिनि' बोलो
तुम मुरली की महतारी हो,
'बोबो' की बेटी प्यारी हो,
तुम 'चंद्रकला की चाची' हो,
तुम 'भानामल की बूआ' हो,
तुम हो 'गुपाल की बहू'
..........कहो क्या कहूं ?
तुम्हारे घर में कैसे रहूं ?

कुछ नए नाम ईज़ाद करूं,
प्राचीन प्रथा बर्बाद करूं,
या रूप, शील, गुण, कर्मों से ही
तुम्हें पुकारूं याद करूं ?
कि 'बुलबुल' कहूं कि 'मैना' कहूं,
कि मेरी 'सोनचिरय्‌या' बोलो तो,
ये रसमय अपनी चोंच
'कोयलिया' खोलो तो !

 

 


 

 

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