तो, सुनो मेरी कहानी

भूमिका
वंदे हास्यरसम
व्यंग्य-विनोद शास्त्र से लोक तक
समय की देन हूं मैं
कहां लौं कहिए ब्रज की बात
राष्ट्रवाणी
हिन्दी चले तो कैसे चले
आपुन मुख हम आपुन करनी
यह विस्फोट अहम्‌ का है
तो सुनो मेरी कहानी
ओम शान्ति !
कहते सुनेंगे, मेरी कहानी ? इतनी फुरसत है आपको ? लोग आम खाते हैं, पेड़ नहीं गिनते। अखबार पढ़ते हैं, लेकिन पत्र-पत्रिकाओं के लिए कितने लोग मर-खपकर नींव की ईंट बन गए हैं, इसे नहीं जानते। जानना कोई जरूरी भी नहीं। ताजमहल सुंदर है। कुतुबमीनार बहुत ऊंची है। चित्तौड़गढ़ का किला बड़ा विशाल है। ब्रह्मपुत्र नदी बड़ी लंबी है। प्रयाग में किले के नीचे यमुना बहुत गहरी है। इतना जान लेना ही क्या कोई कम है। दुनिया में एक-से-एक बड़े शिल्पी, चित्रकार, कवि, कलाकार और महापुरुष होगए हैं। कौन इन्हें खोजे और कौन इनके करतबों पर जाए ? आज के आदमी को अपनी राम कहानी से ही फुरसत कहां है ? फिर मेरी कर्म-कहानी ! न मैं कोई बड़ा कवि, न उल्लेखनीय लेखक और न ही ऐसा पत्रकार कि जिसकी कलम ने कोई धुआंधार करिश्मा ही करके दिखा दिया हो, फिर ऐसी क्या मुसीबत आ पड़ी है कि मेरी कहानी आप सुनें-ही-सुनें ?
फिर भी सुन ही लीजिए। आखिर विविध भारती के गानों के बीच आप अवांछित विज्ञापन सुनते ही हैं। जनसभाओं में मनपसंद वक्ता से पहले, समय काटने वाले नेताओं, उपनेताओं और भीड़ को बहलाने वाले जोकरों की तकरीर सुनने और देखने की भी तकलीफ़ आप गवारा कर ही लेते हैं। दावतों में मिष्ठान्न से पहले भांति-भांति के खट्टे-चरपरे और पेट-भराऊ पदार्थों से काम निकालते ही हैं। राम-राज्य की लालसा में स्वराज्य से पूर्व तथा स्वराज्य के बाद सब कुछ झेलते-सहते ही आए हैं, तो एक मुसीबत यह भी सही।
मेरी कहानी में शैतानों का जिक्र आएगा। लेकिन ये शैतान की आंत नहीं है। यह एक छोटे-से आदमी की छोटी-सी कहानी है। ऐसे आदमी की कहानी, जिसने पढ़ाई की कोई डिग्री प्राप्त नहीं की। जो किसी बड़े बाप का बेटा, या किसी बड़े या मंझोले नेता की पत्नी का सगा या मुंहबोला भाई भी नहीं। जिसका संबंध राजनीति के इस या उस दल के साथ भी नहीं जुड़ा। या जो स्वराज्य से पहले या उसके बाद किसी आंदोलन में जेल जाने का सर्टिफिकेट भी प्राप्त नहीं कर सका। हमारे देश में बिना जेल गए कोई बड़ा आदमी बना है ? बिना पद से हटे या हटाए कोई चर्चित हुआ है ? पत्रकार तो हमारे देश में बस वही उल्लेखनीय होता है, जिसे या तो सरकार अपना ले, या उसे किसी महाशक्ति का प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन प्राप्त हो। वह प्रायः नामधारी प्रधान संपादक होता है या

पृष्ठ-1

| कॉपीराइट © 2007: हिन्दी भवन, नई दिल्ली |
1    2    3   4
   | वेब निर्माण टीमः हैश नेटवर्क |