राष्ट्रवाणी

भूमिका
वंदे हास्यरसम
व्यंग्य-विनोद शास्त्र से लोक तक
समय की देन हूं मैं
कहां लौं कहिए ब्रज की बात
राष्ट्रवाणी
हिन्दी चले तो कैसे चले
आपुन मुख हम आपुन करनी
यह विस्फोट अहम्‌ का है
तो सुनो मेरी कहानी
ओम शान्ति !
उन्होंने उनका और अंग्रेजी समर्थकों का दिल जीतने की कभी कोशिश नहीं की। अपनी अहंमन्यता और यहां तक कहें कि दुर्बुद्धि से उन्होंने हिन्दी के दुश्मन ही बढ़ाए हैं, मित्र नहीं। इसलिए यह आवश्यक है कि ऐसे सब लोग फिर से सोचें और अपने कर्तव्य का पुनर्निधारण करें। जो अपना मत न बदल सकें, उन्हें कृपया हिन्दी-आंदोलन से हट जाना चाहिए। हिन्दी सेवा का पथ है, प्राप्ति का साधन नहीं। हिन्दी प्रेम से आगे बढ़ेगी, सरकार की तलवार या संविधान की ढाल लेकर नहीं। हिन्दी के कार्य को सद्धर्म-बुद्धि से करने की आवश्यकता है। राजनैतिक तरीके से प्रपंच, गुटबंदी, वक्तव्य, भाषण और लेखनों से हिन्दी का भला होने वाला नहीं है।
हिन्दी के पक्षधरों को देश में सुमति के भाव जागृत करने हैं। देशवासियों में राष्ट्रीयता की भावना पैदा करनी है। राष्ट्रीय स्वाभिमान को फिर से जागृत करना है। राष्ट्रभाषा का यही पुनीत धर्म है। हिन्दी अगर राजभाषा न बन पाए तो इसमें कोई आपत्ति नहीं, किंतु सच्चे अर्थों में हिन्दी को राष्ट्रवाणी बनाने के कार्य में प्रत्येक राष्ट्रभक्त को लग जाना चाहिए। हिन्दी और राष्ट्र यानी हिन्द दो भिन्न वस्तुएं नहीं हैं। हिन्दी हिन्द का पर्याय है। हिन्दी को सच्चे अर्थों में भारत की आत्मा बनना चाहिए। राष्ट्रभाषा वही हो सकती है जो राष्ट्र की वाणी बनने के उत्तरदायित्व का सही रूप में वहन कर सके। हिन्दी के लेखक, प्रकाशक, पत्रकार अपना दिल टटोलें और सोचें कि हिन्दी को राष्ट्रवाणी बनाने में उनकी भूमिका क्या है ? पुरानी पीढ़ी अपना काम जितना कर सकती थी, कर चुकी। अब हिन्दी को नए तेज से प्रदीप्त करने के लिए आज की तरुणाई को आगे आना चाहिए और यह तय करना चाहिए कि हम हिन्द की सेवा हिन्दी के माध्यम से करें, भले ही इसके लिए उनकी समूची पीढ़ी को नौकरियों और सुविधाओं से वंचित ही क्यों न हो जाना पड़े।
जो बात सबसे महत्वपूर्ण है, वह यह है कि राष्ट्रभाषा समूचे देश के लिए है, केवल कुछ प्रदेशों के लिए नहीं। जब तक हम अन्य हिन्दीतर प्रदेशों को राष्ट्रभाषा के लिए अग्रसर नहीं करेंगे, तब तक हिन्दी सच्चे अर्थों में राष्ट्रभाषा नहीं बनेगी।

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| कॉपीराइट © 2007: हिन्दी भवन, नई दिल्ली |
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