व्यंग्य-विनोद : शास्त्र से लोक तक

भूमिका
वंदे हास्यरसम
व्यंग्य-विनोद शास्त्र से लोक तक
समय की देन हूं मैं
कहां लौं कहिए ब्रज की बात
राष्ट्रवाणी
हिन्दी चले तो कैसे चले
आपुन मुख हम आपुन करनी
यह विस्फोट अहम्‌ का है
तो सुनो मेरी कहानी
ओम शान्ति !
अंग्रेजी ग्रंथकार एडीसन ने 'सिक्स पेपर्स ऑनविट' नामक लेखमाला में 'उक्ति चमत्कार' को प्रधान विषय बनाते हुए चोज़ (विट) और विनोद या परिहास (ह्‌यूमर) का अलग-अलग विवेचन नहीं किया है। फिर भी उसका मत है कि ये दोनों एक दूसरे से भिन्न होकर भी परस्पर विशिष्ट संबंध रखते हैं और प्रायः एक दूसरे पर अवलंबित रहते हैं। अपने ह्‌यूमर नामक लेख में एडीसन ने चोज़ और विनोद के संबंध में एक दिलचस्प और सटीक वंशावली का उल्लेख किया है जो इस प्रकार है- ''परिहास या विनोद के श्रेष्ठ घराने का मूल पुरुष 'सत्य' है। 'सत्य' के शोभनार्थ नामक पुत्र हुआ। 'शोभनार्थ' के यहां उक्ति-चमत्कार नामक बेटा हुआ। 'उक्ति-चमत्कार' ने अपने वंश की 'आनंदी' नामक लड़की से विवाह किया। इस दम्पति के यहां 'विनोद' नामक पुत्ररत्न हुआ। 'विनोद' का जन्म भिन्न-भिन्न स्वभाव वाले माता-पिता से हुआ था, इसलिए उसका स्वभाव भी विलक्षण होगया। कभी वह देखने में गंभीर, कभी चंचल और कभी विलासी मालूम पड़ता था। लेकिन उसमें विशेषतः अपनी माता (आनंदी) के स्वभाव का ही अंश अधिक आया। इसीलिए वह स्वयं चाहे जिस चित्तवृत्ति में रहता हो, दूसरों को उल्लसित किए बिना नहीं रहता।''
व्यंग्य-विनोद पर विचार करते समय प्रायः सभी विद्वानों ने चोज़ (विट) के संबंध में अपने ज्ञानजन्य उदगार इस प्रकार व्यक्त किए हैं। एडीसन कहते हैं कि ''पदार्थों के जिस संबंध दर्शन से पाठकों (या श्रोताओं) में प्रसन्नता और आश्चर्य या चमत्कृति उत्पन्न होती हो, और उसमें विशेषतः चमत्कृति जान पड़े, उसे चोज़ कहते हैं।''
ले हंट का कथन है कि ''साधर्म्य या विनोद दिखलाने के उद्देश्य से विषय या असंबद्ध कल्पनाओं को एक ही स्थान पर पास-पास रखना ही चोज़ या विट है।'' उसका मत यह भी है कि चोज़बाज या हंसमुख मनुष्यों की बातों में असंबद्ध पदार्थों की सुसंबद्धता दिखाई देती है। ले हंट और एडीसन दोनों का यह मानना है कि चोज़ और विनोद (विट और ह्‌यूमर) दोनों ही स्वभावतः भिन्न लक्षणात्मक हैं, परंतु दोनों का संयोग या मिलाप दूध-चीनी की तरह होता है। चोज़ का विषय 'पदार्थों की असंबद्धता है' तो विनोद का विषय 'मानवीय स्वभाव और परिस्थिति संबंधी असंबद्धता' है।
एक और भाषा विषयक टीकाकार विलियम हेजलिट ने भी चोज़ और विनोद (विट और ह्‌यूमर) के भेद पर विचार करते हुए कहा है- ''चोज़ और विनोद दोनों के विषय हास्यमूलक होते हैं।

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