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कोई उन्हें हास्य- सम्राट कहता है, कोई हास्य- रसावतार। कोई उन्हें हिन्दी जगत की एक अद्भुत विभूति मानता है,तो कोई जबरदस्त आयोजक और संगठनकर्त्ता। कोई उन्हें हिन्दी का मर्मज्ञ साहित्यकार कहता है, तो कोई ब्रज भारती की महत्वपूर्ण उपलब्धि तथा ब्रजभाषा और पिंगल का अंतिम विद्वान। कोई उन्हें महान हिन्दीसेवी कहता है, तो कोई हिन्दी का समर्पित पत्रकार।

कुछ लोग उन्हें असाधारण व्यक्तित्व के धनी के रूप में पहचानते हैं तो कुछ उनके असाधारण संघर्ष और परिश्रम की बात करते हैं। कुछ लोग उन्हें उन्मुक्त और अनासक्त मस्ती का पर्याय समझते हैं, तो कुछ उनकी ठिठोली और कहकहों की चर्चा करते हैं। कुछ कहते हैं 'हिन्दी भवन' का निर्माण करवा कर व्यासजी हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गए, तो शेष का मानना है कि 45 वर्षों तक लगातार 'नारदजी खबर लाए हैं' लिखकर उन्होंने संभवतः विश्व में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कुछ लोगों के मन में वे अपनी परिवार-रस की कविताओं 'पत्नी को परमेश्वर मानो','साला-साली' और 'ससुराल चलो' जैसी कविताओं के साथ हमेशा जीवित रहेंगे और 'कुछ कदम-कदम बढ़ाए जा' की कविताओं विशेषकर ' वह खून कहो किस मतलब का आ सके देश के काम नही' के कारण उन्हें कभी भूल नहीं पायेंगे।
तो आइए मिलते हैं पद्मश्री पंडित गोपालप्रसाद व्यास से उनके हर रूप-स्वरूप में, हर रस और रंग में...................


कॉपीराइट © 2007: हिन्दी भवन, नई दिल्ली        वेब निर्माण टीमः हैश नेटवर्क, नेतृत्व: भूपेन्द्र सिंह बिष्ट